Harish Bhatt

Just another weblog

318 Posts

1687 comments

Harish Bhatt

Layout Artist- Inext

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 2899 postid : 15

तेरी याद

Posted On: 10 Sep, 2010 में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

सोचा था
तेरी याद के सहारे
जिंदगी बीता लूंगा
अब तेरी याद आती है
ही जिंदगी के दिन ही बचे
जो बचे भी उनमें क्या तेरे मेरे
क्या सुबह, क्या शाम
बस एक ही तमन्ना है
जहां भी रहो मुझे याद करना
क्योंकि तुम याद करोगे तो
दुनिया से जाते वक्त गम होगा
क्योंकि तुम, तुम हो और हम, हम
राहें जुदा हो गई तो क्या
कभी मिलकर चले थे मंजिल की ओर
अब तो सोच कर भी सोचता हूं
क्यों मिले थे हम और क्यों बिछड़े
सोचता हूं
तेरी याद को ही भुला दूं
पर कमबख्त याद है ही ऐसी
भुलाते भुलाते भी रूला ही देती है तेरी याद.

| NEXT

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (3 votes, average: 3.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

12 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Jacie के द्वारा
October 17, 2016

Now I’m like, well duh! Truly thanufkl for your help.

माया क्सेनिया के द्वारा
November 8, 2010

इस विषय पर बहुत कवितायेँ लिखते है लोग.. लेकिन आपने जो कविता लिखी वो बहुत खुबसूरत और गहरी है और उसमे कुछ ऐसी नयी बातें भी है जो मैंने कहीं नहीं सुनी पहले .. बहुत अच्छा लगा पढके धन्यवाद हरीश जी

Rajnish kumar singh के द्वारा
November 2, 2010

सच कहा आपने,                       बिछडने के बाद sirf yaadein hi rah jati hain…. Aur wo yade bahut hi rulati hain….. phir bad mein…… Dil ro pada kisi ko yaad kar ke…..

Ankur के द्वारा
October 23, 2010

DIL SE LIKHI HAR BAAT SACHCHI AUR ACHCHI HOTI HAI..IS POETRY NE REALLY HUME RULA DIYA AUR MERE SABSE DIL K KARIB K YAAD DILA DIYA..JO KUCH DINO MEIN MUJHSE DOOR JAANE WALA HAI.. AISI HI KAVITYAAEIN PLS LIKHTE RAHIYE..ACHCHA LAGTA HAI

sanjay के द्वारा
September 29, 2010

पता ही चलता और अपने दूर हो जाते है और फिर रह जाती है सिर्फ उनकी याद. बहुत अच्छी कविता.

kushwaha के द्वारा
September 29, 2010

किसी की याद के सहारे जिंदगी बिताना बहुत मुश्किल है. यादें हमेशा रुलाती है.

Pawan Tiwari के द्वारा
September 29, 2010

वाकई लोग छूट पीछे छूट जाते हैं…मगर यादें नहीं जाती…..बहुत अच्छी कविता….

raghav के द्वारा
September 12, 2010

किसी को भुलाना बहुत मुश्किल है. सच में यादें बहुत रुलाती है.

mayank के द्वारा
September 10, 2010

jindgi u hui bashar tnha kafila sath aur safar tanha ,harish ji apne jo kuch likha hai dil se likha hai aur jo dil se likha jata hai usko dil he samjh sakta hai realy great

Piyush Pant के द्वारा
September 10, 2010

भुलाते भुलाते भी रूला ही देती है तेरी याद………… बहुत सुन्दर ……….. बधाई……..


topic of the week



latest from jagran