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Harish Bhatt

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असली खेल तो अब शुरू

Posted On: 1 Oct, 2010 Others में

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सुबह से दिमाग में एक ही बात घूम रही थी, आज फैसला आने वाला है, पता नहीं क्या होगा, इसी उहापोह में दोपहर हो आई। घर से लगभग ५० किमी दूर ऑफिस रोज बस से ही जाना होता है, मैं करीब साढ़े तीन बजे ऑफिस के लिए घर से निकला, मन फैसले को लेकर अशांत था। करीब साढे चार अपने मोबाइल नेट पर बीबीसी हिन्दी की न्यूज ‘अयोध्या में विवादित भूमि हिन्दू गुटों को सौंपने का फैसला’ देखते ही मन शांत हो गया, ठीक उसी तरह जैसे हवा भरे हुए गुब्बारे में कोई सुई चुभा दें। फिर तो लोगों की बाते सुनते-सुनते समय बितने लगा। कोई कह रहा था ऐतिहासिक फैसला है, तो कोई कह रहा था चलो रोज-रोज के विवाद से तो निपटे। मेरा मन प्रसन्न था चलो लोग खुद्गा हैं, माहौल शातिपूर्ण हैं। मैं भी शांत मन से आफिस पहुंचा, देखा वहां न्यूज चैनलों ने अपनी अदालत सजा रखी है। मन फिर अशांत हो गया। हम किसका फैसला सुनकर खुश हो रहे है, अभी असली फैसला तो आया ही नहीं क्योंकि अभी तो बहस ही चल रही हैं। मैं भी सोचने लगा कि कुछ लिख देता हूं अपने ब्लॉग के लिए। क्योंकि इस समय सभी लिखेंगे। बस तेजी से मन में उठे गुबार को कम्प्यूटर स्क्रीन पर उतार दिया। इसी बीच मेरे मित्र ने उसको पढ कर कहा कि अरे भाई रहने दो, बहुत हो गया। इतना लिखा जा चुका है, तुम क्या नया लिख लोगे। दो मिनट के लिए मैं भी चुप हो गया। फिर अचानक जो लिखा था, उसको डिलीट कर दिया, और सोचा मैं क्या लिख सकता हूं। अभी तो बहस चल रही है, असली खेल तो अब शुरू हुआ है, इसके बाद ही हम किसी निर्णय पहुंच पाएगे। समझ नहीं आया जब अयोध्या की विवादित भूमि पर कोर्ट का फैसला सर्वमान्य है और आम पब्लिक ने संयम के साथ फैसला स्वीकार कर लिया है, तो अब बहस क्यों

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9 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Mina के द्वारा
October 17, 2016

The abitliy to think like that is always a joy to behold

Sanay के द्वारा
October 1, 2010

मीडिया ने कुछ ज्यादा ही बहस करवा दी. क्योकि उसको तो अपनी टीआरपी से मतलब है, बाकि का क्या ………

आर एन शाही के द्वारा
October 1, 2010

हरीश जी बहुत सारी बहस इसलिये भी होती है कि कुछ बहस होनी चाहिये । सबको पता है कि जो फ़ैसला हुआ है, उससे इतर कोई भी फ़ैसला सर्वग्राही नहीं हो सकता । लेकिन जिनकी दुकानदारी है, उनके लिये तो जीवन मरण का प्रश्न हो जाता है । जैसे मौलाना बुखारी और हमारा सन्त समाज यदि फ़ैसले से खुश होकर बयान दे दे कि चलो ठीक हुआ अब अपने-अपने घर जाओ, तो फ़िर आगे वो कहां जाएंगे ? साधुवाद ।

    Shiv Prakash के द्वारा
    October 1, 2010

    बहुत अच्छा, इस फैसले पर अब किसी बहस की जरुरत महसूस नहीं होती.

    Indian के द्वारा
    October 3, 2010

    १९९२ की घटना को प्रोत्साहित करता कोर्ट का ये decision कितना न्याय सांगत ये किसी को बताने की ज़रूरत नहीं है. इस फैसले ने १९९२ की घटना में सम्मिलित लोगो के बेगुनाह होने की आधारशिला राखी है और साथ ही साथ भारतीय मुस्लिमो को द्वितीय नागरिक होने का दर्ज़ा दे दिया है. जिस आधार पर फैसला सुनाया गया उस के अनुसार मुस्लिम का कोई भी धर्म स्थल सुरख्सित नहीं है. मीडिया ने जिस तरह से इस फैसले को सही ठहराया है उस की सराहना जितनी भी की जाये कम है. जिस तरह के article और हिन्दू मुस्लिम एकता के फोटो छापे गए वो सरहनिये है. ये वोही मीडिया है जो नॉएडा जैसे एनकाउन्टर और गोधरा जैसे कृत्यों के समय हिन्दू मुस्लिम एकता को भूल जाता है. आतंकियों को सबक सिखाने के लिए जिस गन्दी मानसिकता के साथ मुस्लिम समुदाय को जब मारा कटा जाता है तब मीडिया हिन्दू मुस्लिम एकता के फोटो क्यों नहीं छपती, तब जो लोग ये करते हैं उन्हें क्यों नहीं बताया जाता एक मुस्लिम दरजी राम लाला के कपडे सिलता है. धर्म और जात से ऊपर उठ कर कोर्ट के फैसले का ओलोकन करने वाला कभी इस फैसले को न्याय सांगत नहीं कहेगा और इस कमी को पूरा किया जा साकता है दोषियों को सजा देकर. किसी न्यूज़ पेपर या टीवी चैनल ने दोषियों को सजा देने की बात क्यों नहीं कही? कोर्ट के इस decision के बाद अब भारतीय मुस्लिमो के पास दो ही रस्ते है या तो १९९२, गोधरा और नॉएडा जैसे एनकाउन्टर को बेबस हो कर देखती रहे या अपने अधिकार को पाने के लिए लड़े.


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