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Harish Bhatt

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मेरी पहली कविता

Posted On: 6 Feb, 2011 में

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प्रतियोगिताओं के मेले में
दौर चल रहा कविताओं का
कवियों की देखों अभिलाषा
चांद-सितारों को छूने की आशा
ऐसा मौका निकल न जाए
सोच यह घबरा जाते
पहन पोशाक नेताओं की
शोभा बढ़ाते मंच की
वे पहन कुर्ता पजामा
बेच रहे भविष्य हमारा
ये पहन पोशाक उनकी
करने आए अंकों का सौदा
हो गए बोर सभी
सुन कविता का रूप ऐसा
न कविताओं में कविता
न कवियों में कवि
फिर भी सुन रहे
समय बिताने को ही सही

मेरी सबसे पहली कविता, जो मुझको हमेशा याद रहती है. जिसको मैंने अपनी कॉलेज लाइफ में कॉलेज के वार्षिकोत्सव में कवि सम्मेलन के लिए लिखा था. उस समय इस कविता को लिखना मेरी मजबूरी हो गई थी, क्योंकि मेरे न लिखने पर मेरे दोस्तों के नाराज होने का डर था. क्योंकि उनको गलत फहमी हो गई थी कि मुझको लिखना आता है. उनकी जिद की वजह से मुझको इस कविता को लिखना पड़ा. आखिर इस कविता को सम्मेलन में दूसरा पुरस्कार मिला था. तब मुझको अहसास हुआ था कि कभी-कभी गलत फहमी सही फहमी हो जाया करती है. मेरी सोच कहती है कि मन में उत्पन्न विचारों को शब्दों का आकार दिया जाए तो सकारात्मक परिणाम आने की संभावना बहुत ज्यादा होती है.

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12 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

sudarshan prasad के द्वारा
May 9, 2014

apki kavita mujhe behad pasand aayi. iwant to know about you .plz gave responce your reader.

अलीन के द्वारा
February 2, 2012

हरीश भट्ट जी, नमस्कार! इसे एक तीर से दो शिकार कहू या फिर दो तीर से एक शिकार…सचमुच विचारणीय

rajkamal के द्वारा
February 9, 2011

aadrniy harish ji … saadr prnaam ! aap ka yh pryaas aaj bhi tarif ke kabil hai aur ek aDD inaam jitne ke kabil hai ….. meri pahli tippni shayd post hi nhi ho paai thi aaj jwab dekhne aaya tab pta lga ek skaraatmak aur faldaayk pryaas ki badhaai swikar kre

    Harish Bhatt के द्वारा
    February 10, 2011

    राजकमल जी सादर प्रणाम, आपको मेरा पहला प्रयास अच्छा लगा तो जान कर बहुत ख़ुशी हुयी, बहुत बहुत धन्यवाद.

chaatak के द्वारा
February 9, 2011

स्नेही श्री हरीश जी, आपकी पहली कविता पढ़कर तो आनंद आ गया नेताओं और कवियों की एक साथ खिंचाई का आपका अंदाज़ खूब रहा!

    Harish Bhatt के द्वारा
    February 10, 2011

    चातक जी प्रणाम, आपको कविता अच्छी लगी. बहुत बहुत धन्यवाद. बस इस एक प्रयास का नतीजा है आज आप सबके साथ हूँ.

nishamittal के द्वारा
February 9, 2011

आपकी प्रथम कविता से परिचित करने के लिए व् पुरूस्कार प्राप्त करने के लिए धन्यवाद व बधाई .देहरादून डी.ए वी. में सुनायी थी या डी.बी.अस में

    Harish Bhatt के द्वारा
    February 10, 2011

    आदरणीय निशा जी सादर प्रणाम. आपको कविता पसंद आई बहुत बहुत धन्यवाद. मैंने यह कविता ऋषिकेश राजकीय महाविद्यालय के अनुअल फंक्शन में आयोजित कवि सम्मलेन में सुनाई थी.

Ramesh bajpai के द्वारा
February 7, 2011

प्रतियोगिताओं के मेले में दौर चल रहा कविताओं का कवियों की देखों अभिलाषा चांद-सितारों को छूने की आशा ऐसा मौका निकल न जाए प्रिय श्री हरीश जी इस प्रथम काव्य को यहाँ पोस्ट करने का धन्यवाद | यह छोटा सा प्रयास आज आपको कहा तक ले आया है | बहुत बहुत बधाई उस पल को हम सब में बाटने के लिए

    Harish Bhatt के द्वारा
    February 10, 2011

    आदरणीय वाजपेयी जी सादर प्रणाम आपको मेरी पहली कविता अच्छी लगी बहुत बहुत धन्यवाद. सर मैं क्या करता उस समय इसको जरुरी था. वैसे मैंने दो और कविता नक़ल की थी पर बाद में मैंने उन दोनों तो हटा कर इस कविता को ही पढ़ा था. और आज आपके सबके साथ हूँ

rajeevdubey के द्वारा
February 6, 2011

अब तो भण्डार होगा आपके पास, हरीश जी ! प्रस्तुत करते रहिये.

    Harish Bhatt के द्वारा
    February 10, 2011

    राजीव जी सादर प्रणाम, मेरे पास कोई लेख या कविता पहले की लिखी हुई नहीं बस यूँ ही कभी कभी लिख लेता हूँ और सीधे उसको पोस्ट कर देता हूँ और अब तो आप सबका साथ है जो मुझे और बेहतर लिखने के लिए प्रेरित करता है.


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