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Harish Bhatt

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बहाना अच्छा है समय नहीं मिला

Posted On: 28 Jul, 2011 Others में

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कई दिन हो गए, कुछ लिख नहीं पाया हूं, इसके लिए बहाना अच्छा है कि समय नहीं मिल पाया, जबकि सच्चाई यह है कि मुझको लिखना ही नहीं आता है. कभी वह भी दौर था जब मैं लगभग हर तीसरे दिन एक ब्लॉग लिख लिया करता था, पता नहीं क्या-क्या लिख लिया. लेकिन अब आलम यह है कि मैं कुछ लिखने की सोचता भी हूं तो वह सिर्फ सोच में ही रह जाता है, उसके लिए शब्द नहीं मिल पाते या यूं कहिए कि मेरे शब्दकोष में शब्दों का अकाल पड़ गया है या फिर मेरी सोच थम सी गई है. कहां मैं ब्लागिंग के जरिए क्रांति लाने की बात करते नहीं थकता था और समाज को नई दिशा में ले जाने के प्रयास में मैं खुद ही भूल गया, मुझे कहां जाना है. यह सही बात है कि किसी मुकाम पर पहुंचना जितना आसान है, उतना ही कठिन है, वहां पर बने रहना. पता नहीं कब आपके सितारे गर्दिश में आ जाए और आप धडाम से जमीन पर गिर जाए. हमारा रहन-सहन और आसपास का माहौल ही तय करता है कि हम क्या करेंगे या क्या नहीं करेंगे. सहयोगियों का नीरसपन जिंदगी को बोझिल बना देता है, आखिर आपको उनके बीच ही रहना होता है, और कोई भी बहुमत को नहीं दबा सकता है. बस यही एक बात आपको कुछ भी नया करने से रोकती रहती है. और जो इस माहौल से आगे निकल कुछ नया कर देते है, वह इतिहास बना देते है. हां मेरे सीनियर्स की बातें ही समय-समय पर मुझे कुछ नया करने के लिए प्रेरित करती है, जैसे कि जब तक जिंदा रहो, अपने जिंदा रहने का अहसास जरूर कराना चाहिए. अब जिंदा रहने का अहसास कैसे कराया जाए, क्योंकि हमारे पास इतने अधिकार या साधन नहीं है कि कुछ नया करने का प्रयास भी किया जाए, इसके बावजूद भी जब कुछ नया करने की सोचते है तो हमारा नीरस माहौल बीच में आ खड़ा होता है, बस फिर क्या, लगता है छोडो नया करने की बातें, जैसे चल रहा है चलने दो, कौन सा हम कुछ नया करके इतिहास बना देंगे. आराम से दो वक्त की रोटी का जुगाड हो रहा है होने दो, वरना नया करने के चक्कर में कही यह भी हाथ से निकल जाए. जबकि मेरा मानना है कि कोई आपको अधिकार या साधन सौंप कर अपने पैरों पर कुल्हाडी नहीं मारना चाहेगा. आपको तो बस जो आपके पास मौजूद है उसमें ही बेहतर करना होगा. बस यही एक छोटी सी बात मेरे आत्मविश्वस को बनाए रखती है, वरना तो अपने आसपास के माहौल की क्या कहूं, वह तो जिंदा होकर भी मृतप्रायः सा लगता है, मुझे न तो अपने आसपास का माहौल बदलने में रूचि है और न ही समाज को बदलने का जज्बा. मेरा तो एक ही प्रयास रहता है कि हर पल हरेक से कुछ न कुछ सीखते चलो. बस इसके चलते मैं अपने ब्लॉग के माध्यम से समय-समय पर आपके बीच में आता रहता हूं.

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4 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Amar Singh के द्वारा
July 31, 2011

बहुत अच्छे हरीश जी, कुछ न लिखने पर भी आपने बड़ी ही खूबसूरती के साथ लिख दिया. इस प्रकार के विषय पर भी लिख लेना किसी अच्छे लेखक की निशानी है. keep it up..

alkargupta1 के द्वारा
July 31, 2011

हरीश जी , काफी दिनों बाद आज आपको पढ़ा जीवन की बहुत सारगर्भित बात कही है हर पल हरेक से कुछ न कुछ सीखते चलो आपका हर ब्लॉग में कुछ न कुछ सन्देश मिलता है !

Ramesh Bajpai के द्वारा
July 30, 2011

प्रिय श्री हरीश जी कल से इस पोस्ट को कई बार पढ़ा , मै शरू से ही आपकी रचनाओ को पढता रहा हु ,| मुझे लिखते हुए भी काफी समय हो गया है | कभी कभी तो कुछ लिखने के बाद दूसरी रचना के बीच का अन्तराल महीनो रहा है | डायरी में लिखने का फायदा यह होता था की उसी रचना को मै कई कई बार दुहरा देता था पर ब्लॉग में यह संभव नहीं | मै आपसे यही कहना चाहता हु की कई बार हमारी अपनी समस्याए/व्यस्तताए लेखन के क्रम को रोक देती है| लेकिन यह स्थिति लम्बे समय तक कायम नहीं रहती | आपकी संवेदना ,सहजता व समाज के लिए कुछ करने का जज्बा मुझे बहुत प्रिय है | यही वह भाव है की आपका व्यक्तित्व मुझे दुसरो से अलग दिखता है | यह इमानदार व सार्थक पहल एक दिन अपने मुकाम तक जरुर पहुचेगी ,इसका पूर्ण बिश्वाश है | आशा है आप पूर्व की तरह अपने ब्लाग को पढने अवसर हमें देते रहेगे | हार्दिक शुभ कामनाये |

Dharmesh Tiwari के द्वारा
July 29, 2011

आदरणीय हरीश भट्ट जी सादर प्रणाम,,,,,,,,,ब्यस्तता बहाना हो सकता है और वैसे भी इस जाब की तो ब्यस्तता ही पहचान है खैर इस बहाने को सामने कर आप हम लोगों को आशीर्वाद देने से बंचित नहीं रख सकते सर,,,,,,,,,,,,,,धन्यवाद!


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