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Harish Bhatt

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आखिर किस बात का इंतजार है?

Posted On: 26 Aug, 2011 में

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अन्ना की आवाज को मिले जबरदस्त जन समर्थन के चलते जहां ने सरकार घुटने टेक दिए है, वहीं विपक्ष पूरी तौर पर अन्ना के साथ आ खड़ा हुआ है। तब यह बात समझ नहीं आ रही है कि अब जनलोकपाल बिल पर बहस की जरूरत क्यों? पहले माना जा रहा था कि सरकार को बिल पास कराने में परेशानी हो रही है। क्योंकि उसको संदेह था कि विपक्ष इस बिल को पास करने की राह में रोड़े अटका जा सकता है। लेकिन अब तो विपक्ष भी अन्ना के साथ आ खड़ा हुआ है। अब सरकार को क्या दिक्कत है। फिर सबसे बड़ी बात जब इस देश का हर नागरिक चाहता है कि जनलोकपाल बिल बनें, तो फिर सरकार क्यों आना-कानी कर रही है। आज हर कोई चाहे गरीब हो या अमीर अपनी खुशी से अन्ना की आवाज से आवाज मिला रहा है। आजादी के बाद से लेकर अब तक किसी भी शख्स को इतना समर्थन नहीं मिला। यह तो जगजाहिर है कि भ्रष्टाचार से हर कोई आहत है। फर्क है तो सिर्फ इतना कि कोई 20 रुपए की रिश्वत देकर दुःखी है तो कोई करोड़ों का घोटाला करके भी खुश नहीं है। अभी कुछ दिन पहले बाबा रामदेव भी रामलीला मैदान पहुंचे थे भ्रष्टाचार के खिलाफ महाभारत का आगाज करने, लेकिन वह खुद ही विवादों में घिरे थे, तो सरकार ने भी रातों-रात उनको वापस आश्रम में भिजवा दिया। लेकिन कहा जाता है कि हर शख्स एक जैसा नहीं होता। जैसे हर कोई गांधी नहीं बन सकता, वैसे ही हर कोई अन्ना नहीं बन सकता। इसलिए अन्ना, अन्ना है। बुलंद भारत की, बुलंद शख्सियत – अन्ना हजारे। अन्ना को हल्के में लेने वाली सरकार के नुमांइदे अब अपनी झेंप मिटाने में लगे है, अन्ना पर दहाड़ने वाले अब माफी मांगते फिर रहे है। आज अन्ना ने देशवासियों को अपने हक के लिए लड़ना सीखा दिया है, उन्होंने बता है कि अपने हक के लिए कैसे लड़ा जाता है। हर पांच साल में घर की चौखट पर हाथ जोड़े नेता जी कैसे मुंह फेर लेते है, इस बात का अहसास भी होने लगा है। यहां पर एक ओर बात है कि लोकतंत्र में चौथा खम्भा माने वाला मीडिया अपनी भूमिका पर खरा उतरता है, रातों-रात अन्ना की आवाज को घर-घर पहुंचा कर उसने जो सराहनीय कार्य किया है, उसकी तो कभी तुलना ही नहीं की जा सकती हैं। यहां पर एक बात समझ नहीं आ रही है कि अन्ना के साथ-साथ देश की जनता चाहती है कि जन लोकपाल बिल पास हो जाए, विपक्ष भी कहता है कि वह अन्ना के साथ है, इस देश से भ्रष्टाचार मिटाना चाहता है, दूसरी ओर कांग्रेस कहती है कि देश को भ्रष्टाचार मुक्त बनाने के लिए वह कटिबद्ध है। जब सभी जन लोकपाल बिल के साथ-साथ देश को भ्रष्टाचार मुक्त बनाना चाहते है तो फिर क्यों समय खराब किया जा रहा है, आखिर देश हमारा है, हमको ही बचाना है तो फिर क्यों दिन पर दिन खराब किए जा रहे है, आखिर किस बात का इंतजार है?

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5 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Amar Singh के द्वारा
August 27, 2011

विशाल जन आन्दोलन को देखते हुए आज नहीं तो कल सरकार को जन लोकपाल बिल पास तो करना ही पड़ेगा. और उसके बाद चलेगा भ्रस्ताचारियो पर लोकपाल का डंडा, बस उसी दिन का इंतज़ार है. http://singh.jagranjunction.com/2011/08/27/%E0%A4%95%E0%A5%88%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%B9%E0%A5%8B%E0%A4%97%E0%A4%BE-%E0%A4%AD%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E0%A4%9F%E0%A4%BE%E0%A4%9A%E0%A4%BE%E0%A4%B0-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%85/

Sharmila के द्वारा
August 27, 2011

प्रिय हरीश जी, आपकी अन्य सभी बातों से पूर्ण सहमती जताते हुए आपकी इस बात पर अपनी विनम्र असहमति जताना चाहता हूँ कि विपक्ष भी अन्ना के साथ है! दरअसल, विपक्ष का अन्ना के साथ खड़ा होना सिर्फ उपरी तौर पर दिखाई देता ताकि अन्ना के साथ उमड़ी अपार जनसमूह की भावनाओं को अपने वोट बैंक के रूप में मोड़ सकें! सच तो यह है कि जन लोकपाल किसी भी राजनेता को पसंद नहीं, क्योंकि ये नहीं चाहते कि इस देश को मनचाहे तरीके से लूटने के इनके विशेषाधिकार को कोई अडंगा लगाये! बाहर में ये जनभावनाओं के साथ होने का छलावा करते हैं और एक दुसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगते हैं किन्तु स्वहित के मुद्दे पर ये सभी एक ही थैली के चट्टे बट्टे हैं! जन लोकपाल के मुद्दे पर लगभग सारे राजनेता, चाहे वो किसी भी दल के हों, आंतरिक रूप से एकमत हैं – वो ये कि किसी तरह इस जन लोकपाल को टालो या दबा दो ताकि दोबारा इस देश में कोई अन्ना पैदा होकर फिर से इनके भ्रष्टाचार को जन जन के बीच उजागर करने का साहस न कर सके और इसके किये किसी सख्त कानून की वकालत न करें! बस, इनका भ्रष्टाचार निर्वाध रूप से चलते रहना चाहिए!

vijay patel के द्वारा
August 26, 2011

समय़ की मांग हैं जनलोक पाल िवधेयक

Manoj के द्वारा
August 26, 2011

अगर गलती से भी अन्ना हजारे वाला लोकपाल लागू हो गया ना तो समझो हमारे आधे से ज्यादा नेता जेल की हवा खाते मिलेंगे जनाब/

    Bijendra Kumar के द्वारा
    August 27, 2011

    Dear Manoj Jee, you are absolutely right. This is the prime reason that no political party seems to be supporting Anna Haare wholeheartedly. In the present culture of amasing vast money by adopting any means, who would like to get his earning opportunities checked or minimised? And this is the reason why no concrete decision could take place even after Respected Anna Hazare’s fast unto death entred its 12th day. I salute the 2nd Gandhi of our India.


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