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Harish Bhatt

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हम संघर्ष करेंगे, अन्ना हमारे साथ है

Posted On: 28 Aug, 2011 में

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अन्ना तुम संघर्ष करो, हम तुम्हारे साथ है का नारा बुलंद करने वालों अब जागते रहना, क्योंकि अन्ना की आवाज ने जब जगा ही दिया है, तो अब क्या सोना? देख लिया सोने का नतीजा. जनता ने कभी अपने नेताओं की नीयत को टटोला नहीं, उन पर भरोसा करके क्या मिला, भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, आर्थिक तंगी के सिवाय. वह तो भला हो अन्ना का जिन्होंने इस देश की वर्षों से सोई जनता को जगा दिया, और ऐसा जगाया कि नेताओं को नानीदादी सब याद आ गई. देश की धडक़न दिल्ली में जो आसन जमाया, वहां से जनलोकपाल बिल पास होने का रास्ता साफ़ करवा ही उठे. आखिर सांसदों को संसद में बिल से जुडी तीन महत्वपूर्ण बातो को मानना ही पड़ा. यह ख़ुशी की बात हो सकती है पर अभी आधी जीत हुई है. अन्ना ने अनशन तोड़ने का निर्णय कर लिया. लेकिन अभी खुशियां मनाने का वक्त नहीं आया है, अभी तो यह शुरूआत है, आगे और लड़ाई है, अब बारी जनता की है. अब अन्ना आराम करेंगे और जनता संघर्ष करेगी, अपने प्रदेश में, अपने जिले में, अपने नगर-गांव में, क्योंकि भ्रष्टाचार नस-नस में समाया हुआ, अब नस-नस की सफाई करनी होगी. अब ढूंढने होंगे, अपने दांये-बायें भ्रष्ट अधिकारी कर्मचारी, और अपने भ्रष्ट जनप्रतिनिधि. वह तभी होगा, जब जनता चौकन्नी होकर भ्रष्ट होते हुए सिस्टम पर अपनी पैनी निगाहें रखेंगी. जनलोकपाल बिल के रूप में भ्रष्टाचार से लडऩे का जो हथियार अन्ना ने जनता को उपलब्ध करवाया है, उसका प्रयोग अब जनता को ही करना होगा. अब नेताओं के भुलावे में कभी मत आना, क्योंकि अब बारी नेताओं की है, कांग्रेस हो भाजपा या कोई और दल इस बिल को पास करवाने की दुहाई देते हुए जनता के दरवाजे पर पहुंचने वाले है. लेकिन ध्यान रखना अगर अन्ना और उनकी टीम के साथ-साथ मीडिया और जनता का दबाव न होता, तो यह बिल कभी पास नहीं होता. इन नेताओं के भरसक प्रयास जब अन्ना के हौसले को नहीं डिगा पाए, तब मजबूरी में अन्ना की तीन बातो पर सहमती जताई. वरना उनकी तो पूरी तैयारी थी, कि किसी भी तरह अन्ना अनशन तोड़ दे और बिल भी पास न करना पडे़. लेकिन अन्ना के बुलंद इरादे और जनता के अपार समर्थन के चलते ऐसा न हो सका और अन्ना ने भ्रष्टाचार से लडऩे का अचूक हथियार जनता को उपलब्ध करवा ही दिया. अब अन्ना तुम आराम करो, संघर्ष हम करेंगे.

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5 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

rajinder prasad के द्वारा
September 14, 2011

भ्रष्टाचार को लेकर पिछले दिनों सरकार और राजनीतिक दलों में उथल-पुथल मची. जिन्होंने आपातकाल के ‘जयप्रकाश आन्दोलन’ को नहीं देखा, उन्हें ‘अन्ना’ के आन्दोलन को देखने से पहले लगा कि देश में गलत कामों को रोकने वाला कोई नहीं है और न ही भ्रष्टाचार-कदाचार को लेकर राष्ट्रीय बहस/आन्दोलन शायद ही खड़ा करने का साहस कोई करे. अन्ना ने इस मिथक को तोड़ने का गंभीर साहस किया गांधीगिरी के सहारे. आन्दोलन खड़ा करने की असफल कोशिश बाबा रामदेव ने भी की, लेकिन उसे पंचर कर दिया सरकार की साजिशी चतुराई ने. अन्ना के आन्दोलन की बेदखली की जीतोड़ कोशिश हुई. लेकिन सत्ता के रणनीतिकारों की बिसात उखर गयी. उडती चिड़िया पहचाननेवाले नेता जनता का आक्रोश नहीं समझ पाए, लेकिन जनता ने आवाज़ सुनाने को बाध्य किया. संसद की गरिमा कम करने के बेतुके आरोप लगाकर क्या संसद में बैठे राजनेता देश को बता पाएंगे कि उनके बीच अपराधी और भ्रष्टाचारी कैसे पहुंचे, इसमें वो विफल हैं या जनता. संसद की गरिमा जितनी राजनेताओं ने कम की, उतनी किसी ने नहीं.

abodhbaalak के द्वारा
August 29, 2011

इश्वर से प्रार्थना है की आपके विश्वास को जनता …………….. http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

आर.एन. शाही के द्वारा
August 28, 2011

हरीश जी, अब अन्ना के इस सपने को भी पूरा करने के लिये कमर कसनी होगी, जिसमें उन्होंने बिना ग्रामसभा की सहमति के सांसदों को किसी नए कानून को पारित करने के लिये अपना समर्थन न देने की बात कही है । साधुवाद !

Amar Singh के द्वारा
August 28, 2011

अन्ना की ३ मांगो को सरकार को मानना ही पड़ा और इस जीत में अभी हमें अधिक खुश नहीं होना चाहिए. लोकपाल विधेयक पिछले ४० सालो से संसद में अटका पड़ा था और जब जब किसी पार्टी ने भी इस बिल को पास करवाने का प्रयास किया तो उस समय उस सरकार का पतन हुआ क्योको लोकपाल बनाने में सदा ही सांसदों के लिए एक खतरा था जो कभी भी उनपर कहर बनकर टूट सकता था. किन्तु जब अब अन्ना हजारे विशाल जन समर्थन के साथ लोकपाल मसोदे की मांग को लेकर अनशन पर बैठ गए तब कही जाकर सरकार इस मसौदे की ३ शर्तो पर राजी हुई लेकिन अन्ना द्वारा उठाई गई ७ शर्ते भ्रस्ताचार की जड़ो तक को हिला देने के लिए काफी थी. किन्तु जैसे की सरकार पिछले ४० सालो से ही लोकपाल बनाने के मन में नहीं थी, इसीलिए उन्होंने लोकपाल मसौदे की उन बाकी बची ४ मांगो के बारे में मौन साध लिया जिससे सांसदों और उच्च वर्ग के भ्र्स्ताचारियो की गर्दने फसती थी. इसलिए अन्ना की भ्रस्ताचार की जंग अभी समाप्त नहीं हुई है बल्कि यह तो युद्ध का अभी बिगुल ही बजा है जिसकी जंग अभी बाकी है और भ्रष्टाचार के विरुद्ध एक लम्बी लड़ाई लड़नी अभी बाकी है. http://singh.jagranjunction.com/2011/08/27/%E0%A4%95%E0%A5%88%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%B9%E0%A5%8B%E0%A4%97%E0%A4%BE-%E0%A4%AD%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E0%A4%9F%E0%A4%BE%E0%A4%9A%E0%A4%BE%E0%A4%B0-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%85/

    ashutoshda के द्वारा
    August 28, 2011

    भट्ट साहब प्रणाम , बहुत ही सुन्दर नारा दिया है आपने एक लाइन के साथ इसको पूरा कर रहा हूँ “अन्ना तुम आराम करों, संघर्ष अब हम करेगें” , “देश से भ्रस्टाचार को, ख़तम कर के ही दम लेंगें ! आशुतोष दा


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