Harish Bhatt

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Harish Bhatt

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खुशी

Posted On: 22 Jan, 2012 में

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खुशियाँ क्यो रूठ जाती है समझ पता मै
एक एक खुशी जोड़ कर खुशियों का आशिया
बनाता हु धीरे धीरे सरक जाती है खुशी
हथेलियों में नही रहा अब दम
जो थाम ले मेरी खुशी
अब तो वक्त का ही सहारा
जो थाम ले मेरी खुशी
आँधियों में चिराग जलने की बात सुनी है
एक तूफ़ान का इंतजार है मुझे
जो उडा लाये मेरी खुशी मेरे पास
या उडा ले जाए मुझे मेरी खुशियों के पास

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6 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Hollie के द्वारा
October 17, 2016

Big help, big help. And suivtlarpee news of course.

nehni के द्वारा
September 17, 2012

बहुत अछि कविता है सर

cb Singh के द्वारा
January 30, 2012

प्रिय भट्ट जी , आपकी कवितायें बहुत सुन्दर और सारभौमिक है | लेकिन आपकी कविताये http://www.hindisahitya.org पर भी प्रकाशित करें |


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