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Harish Bhatt

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बनना होगा अर्जुन

Posted On: 4 Feb, 2012 में

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उलझता इतिहास
अंधकारमय भविष्य
बदतर आर्थिक व्यवस्था
लचर शिक्षा प्रणाली
भटकता नेतृत्व
न जाने
किसने रचा यह चक्रव्यूह
और
इसमें फंस गया आम आदमी
रात के स्याह अंधेरे में
राह दिखती नहीं
जगने से पहले से ही
सो जाती हैं उम्मीदें
इस चक्रव्यूह को तोड़ने की
जितनी करता कोशिश
उतना टूट जाता आम आदमी
जिन पर है विशवास
वह दगा कर रहे
दुनिया आगे जा रही
हम पीछे ही टहल रहे
समझ नहीं आता
किसको दे दोष
जो बोया था कभी हमने
आज वही लहलहा रहा
आंखों के सामने
आओ करो वादा
सुधारना है भविष्य
बचाना है इतिहास
तो बनना होगा अर्जुन
तभी टूटेगा चक्रव्यूह
घर हमारा है
हमको ही बचाना है
गैरों पर न करो विश्वास
खुद से करो शुरुआत.
इसलिए
सोचो, समझो और फिर करो
ईमानदारी से मतदान.

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8 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Sharky के द्वारा
October 17, 2016

Full of salient points. Don’t stop bevinlieg or writing!

Noopur के द्वारा
October 9, 2014

भट्ट जी बहुत अच्छी कविता है साथ ही बहुत अच्छा सन्देष भी है।

akraktale के द्वारा
February 6, 2012

हरीश जी सादर नमस्कार, आओ करो वादा सुधारना है भविष्य बचाना है इतिहास तो बनना होगा अर्जुन तभी टूटेगा चक्रव्यूह घर हमारा है हमको ही बचाना है गैरों पर न करो विश्वास खुद से करो शुरुआत व्यवस्था पर सही टीका.इश्वर आपकी आवाज को बुलंदिया दे और ये जन जन के कानो तक पहुंचे. साधुवाद.

अलीन के द्वारा
February 5, 2012

हरीश भट्ट जी, शुभ प्रभात!… जो बोया था कभी हमने आज वही लहलहा……..कटु सच को वयां करती पंक्तियाँ जिसे हम स्वीकार नहीं करना चाहते. आशा करता हूँ ऐसे ही आशीर्वाद स्वरुप आपकी कलम से रचनाएँ निकलती रहेंगी. सहृदय धन्यवाद…


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