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Harish Bhatt

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हम पागल ही अच्छे

Posted On 22 Mar, 2012 में

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तेरी खामोशी
ये कहां ले आई मुझे
तेरी एक
हां के इंतजार में
बदल गए
रास्ते जिंदगी के
जाना था कहां
पहुंच गए यहां
तेरी राह
देखते-देखते
इरादे पस्त हो गए
अब तो यह आलम है
दिल रोता है
शब्द निकलते है
दुनिया हंसती है
और
कहती है मुझे पागल
कहती है तो कहे
हम पागल ही अच्छे
किसी को
गुमराह तो नहीं करते
बस यूं ही लिखते है
मन को शांत करते है
और क्या रखा है अब
यूं ही प्यार से मिलते है
शायद
किसी की दुआ
हो जाए मेरे नाम
और
ख़ामोशी के आलम में
बना डालू
शब्‍दों का ताजमहल

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27 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

harirawat के द्वारा
March 17, 2013

वाह मजा आगया हरीश भट्ट जी, कविता दिल को छूने वाली है !

zieisha के द्वारा
August 1, 2012

whos the poet plz tell plz

    Harish Bhatt के द्वारा
    August 1, 2012

    यह कविता मैंने ही लिखी है.

shiv shambhu sharma के द्वारा
June 29, 2012

किसी को गुमराह तो नहीं करते बस यूं ही लिखते है मन को शांत करते है बहुत सुन्दर धन्यवाद

Muneesh Parichit के द्वारा
May 30, 2012

very nice sir congratulations

TARUN DIXIT के द्वारा
May 3, 2012

HELO HARISH JEE, मैं हूँ एक हरयाणवी गीत लेखक और मैं भी यही मानता हूँ की मैं भी पागल हूँ | हालाँकि इस दुनिया में हर इंसान पागल है , जैसे कोई पैसे के पीछे तो कोई अपने प्यार को पाने के पीछे और मैं पागल हूँ इस जहां को खुश देखने के पीछे कि कब ये दुनिया खुश रह पाएगी | शायद इस कलियुग में तो कभी नहीं | लेकिन मैं दुआ करता हूँ कि आप सदा खुश रहें | धन्यवाद ! तरुण दीक्षित गाँव रामपुर खोर पोस्ट अमरपुर तह.&जिला पलवल हरियाणा पिन कोड 121102 tarundixitrpk@gmail.com 09671886217

    ROHTASH के द्वारा
    January 2, 2013

    बहुत अच्छा है लकिन एक दो हरयाणवी में भी लिख दो

    Anjali Vyas के द्वारा
    March 2, 2014

    insaan dusro ki khushi nhi dekh sta or aap duniya ko khush dekhna chahte ho accha lga y jaankar

Rajesh Raj के द्वारा
April 14, 2012

दिन हुआ है तो रात भी होगी, हो मत उदास कभी तो बात भी होगी, इतने प्यार से दोस्ती की है खुदा की कसम जिंदगी रही तो मुलाकात भी होगी. कोशिश कीजिए हमें याद करने की लम्हे तो अपने आप ही मिल जायेंगे तमन्ना कीजिए हमें मिलने की बहाने तो अपने आप ही मिल जायेंगे . महक दोस्ती की इश्क से कम नहीं होती इश्क से ज़िन्दगी ख़तम नहीं होती अगर साथ हो ज़िन्दगी में अच्छे दोस्त का तो ज़िन्दगी जन्नत से कम नहीं होती सितारों के बीच से चुराया है आपको दिल से अपना दोस्त बनाया है आपको इस दिल का ख्याल रखना क्योंकि इस दिल के कोने में बसाया है आपको . अपनी ज़िन्दगी में मुझे शरिख समझना कोई गम आये तो करीब समझना दे देंगे मुस्कराहट आंसुओं के बदले मगर हजारों दोस्तो में अज़ीज़ समझना .. हर दुआ काबुल नहीं होती , हर आरजू पूरी नहीं होती , जिन्हें आप जैसे दोस्त का साथ मिले ,

nisha के द्वारा
April 7, 2012

वहुत सुन्दर रचना………

follyofawiseman के द्वारा
April 4, 2012

इससे पहले कि तुम शब्दों का ताजमहल बनाना,  ए पागल तुम अपनी मुमताज को ज़रूर दफनाना…

Sanjay के द्वारा
March 26, 2012

हरीश जी नमस्ते. बहुत सुन्दर कविता के लिए हार्दिक बधाई.

yamunapathak के द्वारा
March 26, 2012

सच कहूँ तो इसमें से प्रत्येक पंक्ति हर लेखक की आवाज़ सदृश है.इस कलम में वो जादू है कि सारी श्रृष्टि को बदल सकती है बस हर शब्द सकारात्मक दिशा पर धाराप्रवाह बढ़ते जाने चाहिए. आपकी यह कविता बहुत अच्छी लगी

    Harish Bhatt के द्वारा
    March 26, 2012

    यमुना जी सादर प्रणाम. आपको कविता अच्छी लगी, बहुत बहुत धन्यवाद.

sanjay dixit के द्वारा
March 25, 2012

सुन्दर अभिव्यक्ति ,बधाई

    Harish Bhatt के द्वारा
    March 26, 2012

    sanjay ji namaskar. kavita pasand karne ke liye bahut bahut dhanyvad.

nishamittal के द्वारा
March 24, 2012

सुन्दर भावाभिव्यक्ति हेतु बधाई हरीश जी.

    Harish Bhatt के द्वारा
    March 26, 2012

    आदरणीय निशा जी सादर प्रणाम. कविता पर उतासहवर्धक प्रतिक्रिया के लिए बहुत बहुत धन्यवाद.

March 23, 2012

बहुत अच्छे..। मन की वेदना और अकेलेपन के त्रासद बोध को इससे ज्यादा बेहतर शब्दों में नहीं ढाला जा सकता। 

    Harish Bhatt के द्वारा
    March 26, 2012

    अकबर जी नमस्ते. कविता पसंद करने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद.

ajaydubeydeoria के द्वारा
March 23, 2012

हम पागल ही अच्छे किसी को गुमराह तो नहीं करते बस यूं ही लिखते है मन को शांत करते है और क्या रखा है अब यूं ही प्यार से मिलते है शायद किसी की दुआ हो जाए मेरे नाम और ख़ामोशी के आलम में बना डालू शब्‍दों का ताजमह सुन्दर अभियक्ति. हृदयस्पर्शी रचना.

    Harish Bhatt के द्वारा
    March 26, 2012

    अजय जी नमस्ते. कविता पर सकारात्मक प्रतिक्रिया के लिए बहुत बहुत धन्यवाद.

Poojan के द्वारा
March 23, 2012

हरीश जी बहुत सुन्दर….. हार्दिक आभार . यूं ही प्यार से मिलते है शायद किसी की दुआ हो जाए मेरे नाम और ख़ामोशी के आलम में बना डालू शब्‍दों का ताजमहल

    Harish Bhatt के द्वारा
    March 26, 2012

    पूजन जी नमस्कार. प्रतिक्रिया के लिए बहुत बहुत धन्यवाद.

dineshaastik के द्वारा
March 23, 2012

शायद गजल का शीर्षक अमर शहीद राम प्रसाद विस्मिल की गजल की एक पंक्ति है- घने ख्यालों में खवाबों के लच्छे हैं, हमें पागल ही रहने दो कि हम पागल ही अच्छे हैं। सुन्दर भावाव्यक्ति के लिये बधाई…….

    Harish Bhatt के द्वारा
    March 26, 2012

    दिनेश जी कविता पसंद करने के लिए हार्दिक धन्यवाद.

    sureshjayswal के द्वारा
    January 8, 2013

    बहुत सुन्दर कविता ,सर अगर आमके पास बिस्मिल साहब की पूरी कविता हो तो कृप्या मुझे JSK.MANN77@GMAIL.COM पर सेंड करे.यही विनय.धन्यवाद.


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