Harish Bhatt

Just another weblog

318 Posts

1687 comments

Harish Bhatt

Layout Artist- Inext

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 2899 postid : 787

मैंने क्या किया?

Posted On: 25 Jun, 2012 में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

मैं जानता हूं
आप कुछ नहीं कर सकेंगे
पढ़ कर, सोचेंगे थोड़ा
या हो सकता है
बिल्कुल भी नहीं देंगे ध्यान
सही भी है
आपकी भी अपनी हैं परेशानियां
ऐसे में मेरे लिए कहां होगा समय
लेकिन फिर भी बताता हूं आपको
अपने मन की बात
बहुत परेशान करती है
छोटी-छोटी बातें
हो कोई बड़ी समस्या
तो की जा सकती है तैयारियां
मांगी जा सकती है मदद
लेकिन क्या करूं
जब समस्याएं हो छोटी-छोटी और
फैला दूं हाथ – मांगू मदद
तब लगता है
आखिर अब मैंने क्या किया?
फिर जुटाता हूं हिम्मत
निकालता हूं समस्याओं का हल
लेकिन अचानक देखता हूं क्या
फिर आ गई एक और समस्या
शायद यही है जिंदगी का सफर
कभी आसान तो कभी कठिन
पहुंचना है सबको मंजिल पर अपनी
हो सकते है रास्ते अलग-अलग
परेशानियां, जुदा-जुदा
खुद तो हूं मैं परेशान
आपको भी कर दिया परेशान
लेकिन क्या करूं?
बस यूं ही
आप अपने रास्ते, मैं अपने रास्ते
चलते जा रहे है अनंत की तलाश में
एक-दूसरे के सहयोग प्यार के सहारे.

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (23 votes, average: 3.78 out of 5)
Loading ... Loading ...

17 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Stella के द्वारा
October 17, 2016

Great inhgsit. Relieved I’m on the same side as you.

sohan lal atal के द्वारा
August 9, 2014

harish ji aap bhut achhe lekhk ho jo sarl bhash me bhut kuchh kahte ho.very2 thanks

deepakbijnory के द्वारा
August 15, 2013

सरल और सहज रचना वह

Madan Mohan saxena के द्वारा
October 29, 2012

बहुत सुंदर भावनायें और शब्द भी … बेह्तरीन अभिव्यक्ति …!! शुभकामनायें. बेह्तरीन अभिव्यक्ति .आपका ब्लॉग देखा मैने और नमन है आपको और बहुत ही सुन्दर शब्दों से सजाया गया है लिखते रहिये और कुछ अपने विचारो से हमें भी अवगत करवाते रहिये.

drvandnasharma के द्वारा
October 16, 2012

बहुत सुदर अभिव्यक्ति .शायद यही है जिंदगी का सफ़र

shristi singh yadav के द्वारा
August 9, 2012

हरीश जी ,,,, आपको कोटि कोटि नमन…………….आम इन्सान की उलझनों और परेशानियो को कितनी बारीकी से पेश किया है आपने .सही भी है इस दुनिया में किसी के पास इतना समय नही हकी हम उसे अपनी परेशानी बता सके और जिसके पास है .उसकी खुद की भी परेशानी है .सलाल और सिध्ही भाषा में अपनी बात कहने के लिए शुक्रिया .. तहे दिल से आभार पुनः ,,,,,,,,,,,,,,बहुत बहुत बधाई हो आपको मेरी और से और नमस्कार …………….

Puneet Vyas के द्वारा
July 2, 2012

All Ends to On Place,How ever paths are different

Mohinder Kumar के द्वारा
June 27, 2012

हरीश जी, इस जिन्दगी में अपने हिस्से की जिम्मेदारियां और उलझने हमें खुद ही सुलझानी होती हैं…किसी के पास इतना समय नहीं कि उनसे दो चार हो कर अपनी शांति भी खोये. आज के समय में कोई विरला ही गिरते का हाथ थामता है… मन के भावो को साझा करने के लिय आभार… लिखते रहिये.

allrounder के द्वारा
June 27, 2012

सादर प्रणाम हरीश जी, बहुत ही सरल शब्दों मैं आपने एक आम इंसान की जिन्दगी का फलसफा जो की बहुत ही कठिन है उसे अपनी मजबूत लेखनी से शब्दों मैं उतार दिया है, इसके लिए आपको नमन !

yamunapathak के द्वारा
June 27, 2012

बहुत सुन्दर हरीश जी बस यह चलना जब संगीत बन जाए तो कर्मों की यह राह बहुत आसान हो जाती है हम जहां रहे जो भी अछा काम करें उसमें उल्लास ज़रूर हो बस. कुदरत की सरगम पर एक नज़र डालें. शुक्रिया

nish के द्वारा
June 27, 2012

अप्रतिम भावाभिव्यक्ति ! अद्भुत लेखन ! जय हो ! हरीश भट्ट महाशय , सच्चे अर्थों में साहित्य लेखन के लिए अनंत बधाई स्वीकारें ।

santosh kumar के द्वारा
June 26, 2012

आदरणीय सर ,..सादर प्रणाम बहुत ही अच्छी सच्ची रचना के लिए कोटिशः आभार , चलते जा रहे है अनंत की तलाश में एक-दूसरे के सहयोग प्यार के सहारे……सादर

roshni के द्वारा
June 25, 2012

हरीश जी नमस्कार सुंदर उद्गार … एक दुसरे के सहयोग से ही मंजिले आसान होती है और मुश्किलें हल आभार

anamika के द्वारा
June 25, 2012

गहन अर्थ लिए हुए कविता ….बढ़िया

vikramjitsingh के द्वारा
June 25, 2012

हरीश जी…सादर…. सत्य वचन…….प्रभु….. एक-एक बात…..सवा-सवा लाख की…..


topic of the week



latest from jagran