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Harish Bhatt

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क्यों अकड़ते है लोग

Posted On: 28 Jun, 2012 में

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न जाने क्यों अकड़ते है लोग
जब मालूम होता है सभी को
जाना है एक दिन इस जहां से
प्यार से जीने में क्या जाता है
अकड़ से क्या मिल जाता है
इतने अनजान भी नहीं लोग
बचपन में ही जान जाते है
प्यार से मिलता है प्यार
अकड़ से मिलती है डांट
तब भी न जाने कहां से
जुबान में आ जाती है खटास
इतिहास की बात करता नहीं
खुद देखा है मैंने
कल तक जिन्हें अकड़ते हुए
रूखसत हो गए जहां से
अब वो रहते प्यार से
करते रहते उन्हें भी याद
जाने वाले तो चले जाते है
रह जाती है उनकी यादें
जो न पल-पल रूलाती है
जो न हंसाती है कभी
ऐसा भी क्या जीना
जाने के बाद कोई
भूल से भी न रखे याद
जब होता हो हर काम प्यार से
तब क्यों रहा जाए अकड़ के
न जाने कब किस पल
चले जाए जहां से
लोग कहते है
तुम जियो हजारों साल
मैं मानता हूं
हम जिए कुछ ही साल पर
याद रखें लोग हजारों साल

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9 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Om Parkash Sharma के द्वारा
February 10, 2014

सुंदर प्रेरणादायक कविता.

bdsingh के द्वारा
September 3, 2013

बहुत अच्छी कविता। सुख-शान्ति की प्रधानता रखने की बात ।बहुत अच्छी कविता। “जीवन आधार” एवं ” धर्मजीत आौर जीवन” पढ़ने का कण्ट करें।

prabhat pandey के द्वारा
November 3, 2012

sir really a very nice poem,awsome……………..

yogeshjoshi के द्वारा
September 25, 2012

सुन्दर कविता हरीशजी, एक छोटी सी विनती कुछ अन्य भाषाओ या शब्दों को भी इस्तेमाल करे. कविताओ में चार चाँद लग जाएंगे. अच्छी लेखनी और सुन्दर अभिव्यक्ति.

shristi singh yadav के द्वारा
August 26, 2012

बहुज्त सुंदर अभिवयक्ति सर .,आपकी बधाई हो ,

harendra singh rawat के द्वारा
August 14, 2012

एक सुन्दर कविता ख़ुशी जी. जीवन असली रूप.

phoolsingh के द्वारा
July 16, 2012

बहुत अच्छा सर,

Ravinder kumar के द्वारा
June 28, 2012

हरीश जी, सादर अभिवादन. लोग कहते है तुम जियो हजारों साल मैं मानता हूं हम जिए कुछ ही साल पर याद रखें लोग हजारों साल श्रीमान जी, बेहतरीन कविता की श्रेष्ठतम पंक्तियाँ. हजारों सालों से हमारे संत महात्मा यही समझाते आ रहें हैं के प्रेम ही परमात्मा है, प्रेम ही खुदा है, प्रेम ही सुख शांति का मार्ग है. पर पता नहीं ऐसा कौन सा शैतान हम सब के भीतर बैठा है के हम सब कुछ जानते हुए भी इर्ष्या, द्वेष से जलते रहते है. मार्ग प्रशस्त करती कविता के लिए साधूवाद. नमस्ते जी.

santosh kumar के द्वारा
June 28, 2012

आदरणीय सर ,..सादर प्रणाम जब होता हो हर काम प्यार से तब क्यों रहा जाए अकड़ के न जाने कब किस पल चले जाए जहां से लोग कहते है तुम जियो हजारों साल मैं मानता हूं हम जिए कुछ ही साल पर याद रखें लोग हजारों साल……..बहुत अच्छा सन्देश देती रचना ,..जीवन में कभी कभी जकडन भी हो जाती है,.. हमारी जकडन खुद के प्रति होती है जो बाहर से अकड दिखाई देती है ,..जैसे खुद के प्रति हुआ क्रोध भी अभिव्यक्त होता है ,.. इसे समझने में हम अक्सर गलती करते हैं ,.एक गलती आगे दूसरी गलती का रास्ता खोलती है ,…हम इन गलतिओं को दूर कर निश्चित ही संसार में कुछ सार्थक काम कर सकते हैं ,…. सरल शब्दों में बहुत सुन्दर सन्देश देने के लिए हार्दिक आभार आपका ,..सादर


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