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Harish Bhatt

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हमारा भविष्य

Posted On: 31 Oct, 2012 में

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मैंने देखा है
रोते – बिलखते,
हँसते- मुस्कराते
बच्चोँ को फुटपाथ पर
सिमटे हुए माँ के आँचल में
सूनी निगाहों से ताकते हुए
न जाने,
क्या सोचते होगें वो
मैंने सुना है,
बच्चे होते है
हमारा भविष्य
कभी कभी सोच लेता हूँ कि
हम भी तो कभी थे बच्चे
तो क्या यही है
हमारा भविष्य
भय, बेरोजगारी, भष्टाचार का
कभी न ख़त्म होने वाला माहौल
लगता है डर
न जाए क्या होगा
इन बच्चोँ का, जो रोते है
हर अपनी बेबस माँ के आँचल में
मैंने देखा है
मासूम बच्चोँ को
रोते – बिलखते,
हँसते- मुस्कराते.

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2 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

rohit के द्वारा
January 7, 2013

हैप्पी मकरसक्रांति

Santlal Karun के द्वारा
October 31, 2012

अच्छी रचनात्मकता, अर्थपरक, प्रभावपूर्ण; साधुवाद एवं सद्भावनाएँ ! “लगता है डर न जाए क्या होगा इन बच्चोँ का, जो रोते है हर अपनी बेबस माँ के आँचल में”


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