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Harish Bhatt

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समझाना और समझना

Posted On: 18 Nov, 2012 में

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कभी मैंने उसे न समझा
कभी उसने मुझे न जाना
और
हो गई गलत फहमियां
एक रास्ते के थे हमसफर हम
मंजिलें भी हो गई जुदा-जुदा
न मालूम मैंने क्या समझाया
न जाने उसने क्या समझा
समझने- समझाने के फेर में
समझ- समझ का फर्क आ गया
समझते – समझते आ गई
मुझ में समझ इतनी कि
जिसकी जितनी समझ
उतना ही होता है वह समझदार
इसलिए समझा गया हूं मैं
किसी को समझाने से अच्छा है
खुद ही समझो दुनिया को
क्योंकि खुद से अच्छा कोई नहीं
खुद अच्छे तो दुनिया अच्छी.
खुद बुरे तो दुनिया बुरी.

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4 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Rajni Bapuly के द्वारा
January 12, 2014

बहुत अच्छी है..हरीश जी..

mukesh के द्वारा
November 16, 2013

सौ टका सही

Mahender Kumar के द्वारा
December 15, 2012

किसी को समझाने से अच्छा है खुद ही समझो दुनिया को क्योंकि खुद से अच्छा कोई नहीं खुद अच्छे तो दुनिया अच्छी. खुद बुरे तो दुनिया बुरी.

mrssarojsingh के द्वारा
November 18, 2012

सुंदर कविता . बधाई हो


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