Harish Bhatt

Just another weblog

316 Posts

1687 comments

Harish Bhatt

Layout Artist- Inext

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 2899 postid : 956934

गैरों को तो समझा भी दूँ

Posted On: 26 Jul, 2015 कविता में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

ऐ दोस्त
गैरों को तो समझा भी दूँ
अपने जख्मों का हिसाब
पर अपनों का क्या करू
जो लिए फिरते है हाथो में नमक
जब भी भूलने की करता हूँ कोशिश
तभी आ जाता है अपना कोई
और कहता है
अरे क्या हुआ, कैसे हुआ
इतना सुनते ही फिर
हरा हो जाता है जख्म
चुप रह नहीं सकता
वरना लग जाएगा
एक और इल्जाम कि
देखो हो गया न घमंड
एक तो जख्म दूसरा घमंड
कहा तक दूंगा हिसाब
इस हिसाब किताब के फेर में
वक़्त गुज़रता जा रहा
और हम यूँ ही चलते जा रहे.

हरीश भट्ट

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (5 votes, average: 2.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

6 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Chubby के द्वारा
October 17, 2016

Wait, I cannot fathom it being so stwrdghtforraai.

reena के द्वारा
July 21, 2016

bahut khoob HarishjiN


topic of the week



latest from jagran