Harish Bhatt

Just another weblog

323 Posts

1688 comments

Harish Bhatt

Layout Artist- Inext

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 2899 postid : 1043606

न समझना न समझाना

Posted On: 21 Aug, 2015 कविता में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

तुम क्या हो,
मैं कैसे बता सकता हूं।
तुमने कभी बताया नहीं।
मैंने कभी समझा नहीं।
देखा है जिंदगी को मैंने तो
जिया है तुमने भी जिंदगी को
तुम्हारी सोच और मेरी समझ
तुम्हारी मासूमियत और मेरी बेरूखी
कभी मुस्कारना तो कभी नाराजगी
इनके बीच जिंदगी का बहते जाना
और कदम-दर-कदम यूं ही
खामोशी की चादर ओढे़ चलते जाना
न कभी समझना न कभी समझाना
और बस कहते जाना कि
मैं कैसे बता सकता हूं कि तुम कौन हो
-हरीश भट्ट

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (7 votes, average: 3.57 out of 5)
Loading ... Loading ...

1 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Bhola nath Pal के द्वारा
January 17, 2016

वह भट्ट जी !प्रसंशनीय संतुलन ,शिकायत भी ………….


topic of the week



latest from jagran